Thursday, November 19, 2015

अरे ओ कंपनी के गुलाम

काम-काम में क्या पगला रखा है तू पगले,
एक साल और बड़ा हो जाएगा तू साल अगले,

क्या पता तुझे जीवन तेरा है कितने साल का,
कल ही मर गया तो क्या घंटा खरीदेगा अपने माल का?

जो बीत गया वह बेकार, जो आने वाला वह किस्मत,
जो आज है वह तेरा - फिर क्यों नहीं तुझे फुर्सत?

बुढापे की तरफ बढ़ रहे धीरे धीरे तेरे कदम,
अभी खा ले मस्तबाद में  हो कुछ हजम,

घूम  कही, देख नए नए लोग,
नये नये भोजन का लगा तू भोग,

बाहर निकल, ज़रा फिल्म विल्म देखबीवी को भी दिखा,
जो तूने आखरी फिल्म देखी थीज़रूर होगी उसमे रेखा,

"छुट्टी बिल्कुल नहीं मिलेगी", अब यह भौकना मत,
"छुट्टी तो तेरा बाप भी देगा", सोचके तू बन जा जट्ट, 

चूस लेगी तुझको कंपनी, बनाके तुझको आम,
ज़िन्दगी हो जाएगी झंड, कराएगी इतना काम,

सालो साल बीतेंगे, सैलरी भी नहीं बढ़ाएगी ज़्यादा,
एक नंबर की कमीनी है कंपनी, मान मर्यादा,

आज से तू बस अपनी ख़ुशी का सोच,
छुट्टी ले ले कल, बोल पैर में गई मोच,

और मटरगश्ती कर दिन भर, फैमिली समेत,
गलती से भी करियो फेसबुक पे अपडेट!

वैसे,  काम कर! तू सांस रोक 40-50 सेकंड के लिए! यह जो एहसास है, वह मौत का एहसास है! कुछ नहीं कर सकता तू इस समय!

और अब एक गहरी सांस ले… यह जो एहसास है यह जीवित होने का है… सब कुछ कर सकता है तू इस समय। तो सब कुछ कर!

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