Tuesday, February 15, 2011

सूअर के बच्चे


सूअर के बच्चे करने लगे सड़क पार,
अचानक तभी आ गई एक कार,

सूअर ने दूर से देखा, पाया खुद को लाचार,
पर वो कार न रुकी... थी तेज़ उसकी रफ़्तार,

दो बच्चे कुचले गए, हुए मृत करार,
सूअर के तो दिल में जैसे पड़ी एक दरार,

शायद जीवन से अब उसने मान ली थी हार,
नज़र नहीं आ रहे थे कोई ख़ुशी के आसार,

लगा उसको ऐसा सदमा, वो गया एक BAR,
गटागट चार बीयर पी उसने, और फिर मारी डकार,

और नशे मे आत्महत्या का वो करने लगा विचार,
जीवन को कहना चाहता था टाटा, और मौत को नमस्कार,

पर अगले ही दिन सूअर को मिला यह समाचार,
कि ड्राईवर को पुलिस ने कर लिया गिरफ्तार,

सूअर हुआ बेहद खुश, किया उसने श्रृंगार,
और पास के एक होटल गया, होटल चमत्कार,

आर्डर किया उसने... एक प्लेट पोर्क, रोटी, और अचार,
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वेटर बोला, सूअर सर, हमको दीजिये minutes चार,

दो छोटे सूअर फ्रेश है, हुए थे एक गाड़ी के शिकार,
कढ़ाई में डालके हो जाएंगे आपके लिए तैयार|

Thursday, February 3, 2011

सांड का कांड

Heyo. This is my first ever Hindi Poem. So please ignore spelling mistakes.
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वज़न हो गया था हमारा 90 किलो, बदन था बड़ा मोटा,
जो भी कपड़ा अलमारी में दिखा, वोह निकला हमको छोटा,

यहाँ बचपन जा रहा था, तो वहां जवानी छा रही थी,
पर कॉलेज में सैक्सी लड़किया हमको नहीं बुला रही थी,


खैर... कौन देखेगा ऐसे गैंडे को, यह मैने सोचा,
जिम करूँ या जौग्गिंग, दिमाग में हुआ लोचा,

चला मै फ़िर जिम की तरफ़, बनाके इरादा,
सिक्स पैक एब्स चाहिए अब, न कम न ज़्यादा,


जिम तो मै जाने लगा, पर हो गयी थी एक दुविधा,
बाहर एक रेड़ी वाले ने, की थी गन्ने के रस की सुविधा,

फ़िर क्या था...

हम रोज़ जिम गए, और रोज़ पीया जूस,
गलती कर रहे थे बड़ी, हुआ न महसूस,


महीने के बाद जब वज़न चेक किया, मन में लेके आस,
यह क्या? वज़न तो हमारा हो चला था सौ किलो के पास,

हाय राम... मै लुट गया... मै हो गया बर्बाद,
सारे मोटे गैंडे अब मुझे कहने लगेंगे उस्ताद,


सोचा दुनिया त्याग देंगे, ख़त्म होगी टेंशन,
धरती पे होगा बोझ कम, और बचेगा थोड़ा राशन,

रस्सी बांधी पंखे पे, अलविदा कह रहे थे हम,
जैसे ही गला बांधके लटके, आवाज़ आई...
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धड़म!

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